खड़ंजा मरम्मत के भुगतान पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, जांच की मांग
मिहींपुरवा बहराइच ब्यूरो 16 सितंबर। ग्राम पंचायत लालपुर चंदाझार में खड़ंजा मरम्मत के नाम पर हुए भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताते हुए जांच की मांग की है

खड़ंजा मरम्मत के भुगतान पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, जांच की मांग
मिहींपुरवा बहराइच ब्यूरो 16 सितंबर। ग्राम पंचायत लालपुर चंदाझार में खड़ंजा मरम्मत के नाम पर हुए भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताते हुए जांच की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक रत्न के घर से गुरुदीन के घर तक खड़ंजा मरम्मत कार्य के लिए सरकारी अभिलेखों में 1,56,722 रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। शिकायत के अनुसार 25 मई 2026 को 15वें राज्य वित्त आयोग से 78,361 रुपये की दो प्रविष्टियों के जरिए कुल 1,56,722 रुपये की धनराशि निकाली गई है। शिकायत में कार्य कोड 52101764 का भी उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि भुगतान के बावजूद मौके पर मार्ग की स्थिति खराब बनी हुई है और बारिश के दौरान यहां कीचड़ व जलभराव होने से आवागमन प्रभावित होता है। शिकायतकर्ताओं ने मार्ग की वर्तमान स्थिति के जीपीएसयुक्त फोटो भी उपलब्ध कराए जाने की बात कही है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि करीब तीन वर्ष पहले इसी मार्ग पर खड़ंजा मरम्मत के नाम पर धनराशि खर्च किए जाने की बात सामने आई थी, इसके बावजूद दोबारा भुगतान होने से कार्य की गुणवत्ता और आवश्यकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत के बाद मौके पर काम शुरू किए जाने को लेकर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि पीली ईंट से खड़ंजा लगाने का प्रयास किया गया, जिसकी गुणवत्ता को लेकर राजू, रामगोपाल, सत्येंद्र, राजकुमार, राकेश समेत अन्य ग्रामीणों ने जांच की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार मौके पर पहुंचे बीडीओ विजय कुमार कुछ देर बाद वहां से चले गए, जिसके बाद ग्रामीण संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने के लिए कार्यालय पहुंचे और काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और संबंधित जेई की भूमिका की जांच के साथ स्वतंत्र तकनीकी टीम से कार्य का स्थलीय सत्यापन कराने की मांग की है। उन्होंने अभिलेखों, निर्माण सामग्री, कार्य की वास्तविक मात्रा, भुगतान संबंधी दस्तावेजों तथा पूर्व में कराए गए कार्य की भी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में यदि भुगतान और मौके पर कराए गए कार्य में अंतर या अन्य अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई के साथ सरकारी धन की वसूली की जाए। फिलहाल मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी कि अभिलेखों में दर्ज धनराशि के सापेक्ष मौके पर कितना कार्य कराया गया है।




