कागजों में खड़ंजा, धरातल पर कीचड़; 1.56 लाख की निकासी पर उठे सवाल
मिहीन पुरवा बहराइच लालपुर चांदाझार में खड़ंजा मरम्मत के नाम पर धनराशि खर्च होने का दावा, मौके पर काम न होने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप

कागजों में खड़ंजा, धरातल पर कीचड़; 1.56 लाख की निकासी पर उठे सवाल
मिहीन पुरवा बहराइच
लालपुर चांदाझार में खड़ंजा मरम्मत के नाम पर धनराशि खर्च होने का दावा, मौके पर काम न होने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप
शिकायत के बाद पीली ईंट से काम शुरू कराने का आरोप, ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल; स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग
मिहींपुरवा (बहराइच)। ग्राम पंचायत लालपुर चंदाझार में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिस मार्ग पर खड़ंजा मरम्मत के नाम पर 1,56,722 रुपये खर्च किए जाने का अभिलेखों में उल्लेख है, वह मार्ग अब भी कच्चा और कीचड़ से बदहाल है। मौके पर खड़ंजा मरम्मत का अपेक्षित कार्य दिखाई नहीं देने का दावा करते हुए ग्रामीणों ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की है। उन्होंने स्थानीय स्तर के बजाय स्वतंत्र अथवा राज्यस्तरीय तकनीकी टीम से जांच कराकर कार्य का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
दो किस्तों में निकासी का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार 25 मई 2026 को 15वें राज्य वित्त आयोग के तहत 78,361-78,361 रुपये की दो प्रविष्टियों में कुल 1,56,722 रुपये की धनराशि निकाली गई। अभिलेखों में यह राशि रत्न के घर से गुरुदीन के घर तक खड़ंजा मरम्मत कार्य के लिए दर्शाई गई है। शिकायत में कार्य कोड 52101764 का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने भुगतान प्रक्रिया के साथ ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और संबंधित अवर अभियंता (जेई) की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
मौके पर नहीं दिखा मरम्मत कार्य
ग्रामीणों का कहना है कि जिस रास्ते पर खड़ंजा मरम्मत का कार्य दर्शाया गया है, उसकी वर्तमान स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। मार्ग पर कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन प्रभावित है। ग्रामीणों ने मौके के जीपीएसयुक्त फोटो भी शिकायत के साथ लगाए जाने की बात कही है। उनका सवाल है कि यदि अभिलेखों में दर्ज कार्य वास्तव में कराया गया है तो उसका प्रभाव धरातल पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा।
तीन साल बाद फिर उसी मार्ग पर सवाल
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि करीब तीन वर्ष पहले इसी मार्ग पर खड़ंजा मरम्मत के नाम पर धनराशि खर्च की गई थी। ग्रामीणों का दावा है कि उस समय भी अपेक्षित कार्य नहीं कराया गया। अब उसी मार्ग पर दोबारा धनराशि खर्च किए जाने के आरोप सामने आने से पंचायत के विकास कार्यों की निगरानी और तकनीकी सत्यापन पर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायत के बाद शुरू कराया गया काम
ग्रामीणों के मुताबिक उच्चाधिकारियों से शिकायत किए जाने के बाद बीडीओ और पंचायत सचिव सक्रिय हुए और मार्ग पर काम शुरू कराया जाने लगा। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर पीली ईंट लाकर खड़ंजा लगाने का प्रयास किया गया। इसकी जानकारी मिलने पर राजू, रामगोपाल, सत्येंद्र, राजकुमार, राकेश समेत अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे और ईंट की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए।
ग्रामीणों के अनुसार, इसी दौरान बीडीओ विजय कुमार मौके से चले गए। इसके बाद ग्रामीणों ने अधिकारियों से मामले में जवाब लेने के लिए कार्यालय पहुंचकर इंतजार किया। उनका कहना है कि काफी देर तक जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध नहीं हुए और फोन से संपर्क का प्रयास भी सफल नहीं हुआ।
जांच से सामने आएगा अभिलेख और धरातल का सच
मामले के सामने आने के बाद पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के भौतिक सत्यापन, तकनीकी जांच और भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराकर मौके पर कार्य की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराया जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो सरकारी धन की वसूली के साथ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब जांच का विषय यह है कि अभिलेखों में दर्ज खड़ंजा मरम्मत कार्य वास्तव में कितना और कब कराया गया तथा 1,56,722 रुपये की धनराशि किस आधार पर खर्च की गई। जांच के बाद ही कागजों में दर्ज कार्य और धरातल की स्थिति के बीच सामने आए अंतर की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। जय




