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उत्तर प्रदेश

घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण विषयक कानूनी प्रशिक्षण 

कानूनी अधिकारों के प्रति महिलाओं व किशोरियों को किया गया जागरूक 

घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण विषयक कानूनी प्रशिक्षण

 

कानूनी अधिकारों के प्रति महिलाओं व किशोरियों को किया गया जागरूक

 

प्रेरणा परियोजना के तहत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में अधिवक्ता ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव ने दी कानून की विस्तृत जानकारी

 

नानपारा/बहराइच। महिलाओं एवं किशोरियों को उनके कानूनी अधिकारों, महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों तथा आपातकालीन सहायता की जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम निबिया शाह मोहम्मदपुर के मजरा पसियनपुरवा में कानूनी जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम लखनऊ डीएसडब्ल्यूएस कैथोलिक डायोसिस संस्था द्वारा नानपारा के ब्लॉक बलहा क्षेत्र में संचालित प्रेरणा परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, किशोरियां एवं अभिभावक मौजूद रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के समन्वयक सिस्टर शालिनी द्वारा संस्था के कार्यों एवं कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी देने के साथ हुआ। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं और किशोरियों को उनके अधिकारों एवं उपलब्ध कानूनी सहायता के प्रति जागरूक करना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार के शोषण अथवा हिंसा की स्थिति में वे भयभीत होने के बजाय कानून का सहारा ले सकें।

बाल विवाह और घरेलू हिंसा पर विशेष चर्चा हुई।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अधिवक्ता ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव ने महिलाओं एवं किशोरियों को कानून की विभिन्न महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने बाल विवाह, घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा, स्त्रीधन, भरण-पोषण तथा महिलाओं के मौलिक एवं कानूनी अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी केवल न्यायालय में मुकदमा लड़ने के लिए नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए भी आवश्यक है। महिलाओं को यह समझना चाहिए कि हिंसा केवल शारीरिक मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक, आर्थिक और अन्य प्रकार का उत्पीड़न भी कानूनी संरक्षण के दायरे में आ सकता है।

अधिवक्ता श्रीवास्तव ने महिलाओं को यह भी समझाया कि बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दें और किसी भी परिस्थिति में कम उम्र में विवाह का दबाव न बनाएं।

नाबालिग बालिकाओं की शिक्षा और सरकारी सहायता पर जानकारी देते हुए बताया गया कि यदि किन्ही दो बालिकाओं के पिता जीवित नहीं हैं अथवा परित्यक्त हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, तो उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाओं एवं सहायता प्राप्त की जा सकती है।

कार्यक्रम में महिलाओं को यह संदेश दिया गया कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण बेटियों की पढ़ाई बंद नहीं होनी चाहिए। जरूरतमंद परिवारों को उपलब्ध सरकारी सहायता, छात्रवृत्ति एवं अन्य योजनाओं के संबंध में संबंधित विभागों से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में महिलाओं और किशोरियों को आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता लेने के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक हेल्पलाइन सूची के अनुसार 112 पुलिस आपातकालीन सहायता, 1090 महिला पावर लाइन, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन तथा 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसे नंबर उपलब्ध हैं।

अधिवक्ता श्रीवास्तव ने महिलाओं से कहा कि किसी प्रकार की हिंसा, उत्पीड़न, छेड़छाड़, धमकी अथवा असुरक्षा की स्थिति में चुप रहने के बजाय उचित माध्यम से सहायता प्राप्त करें। उन्होंने विशेष रूप से किशोरियों को गुड टच-बैड टच, व्यक्तिगत सुरक्षा और अपनी बात विश्वसनीय व्यक्ति तक पहुंचाने के महत्व के बारे में जागरूक किया।

कानून का सहारा लेने के लिए किया प्रेरित

प्रशिक्षण में महिलाओं को अपने हक एवं अधिकारों के प्रति आवाज उठाने और कानून का सहारा लेने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ता ने कहा कि कानून तभी प्रभावी साबित होगा जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसकी जानकारी पहुंचे और पीड़ित व्यक्ति बिना भय के उपलब्ध सहायता व्यवस्था का उपयोग कर सके।

महिलाओं ने भी कार्यक्रम के दौरान अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं को सामने रखा। अधिवक्ता ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव ने उनके प्रश्नों का सरल भाषा में उत्तर देते हुए कहा कि किसी भी कानूनी समस्या में जल्दबाजी अथवा अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय उचित कानूनी सलाह लेना चाहिए।

संस्था के प्रयासों की सराहना

कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीण महिलाओं एवं अभिभावकों ने इस प्रकार के प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की। महिलाओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के कार्यक्रम होने से उन्हें उन अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी मिलती है, जिनके बारे में सामान्यतः उन्हें जानकारी नहीं होती।

कार्यक्रम के अंत में संस्था की ओर से सभी प्रतिभागियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया गया। ग्राम ककहरी में आयोजित यह कानूनी जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं एवं किशोरियों को आत्मनिर्भर, जागरूक और अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। कार्यक्रम में रुबीना परवीन, मुस्कान श्रीवास्तव और अंजुम सहित तमाम कार्यकत्रियों का विशेष योगदान रहा।

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