UP में लेखपालों का दर्द: 200 रुपये साइकिल भत्ता, 100 रुपये में स्टेशनरी और 1500 में मकान भाड़ा, योगी जी सुनिए पुकार
उत्तर प्रदेश में सरकार की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने वाला लेखपाल आज खुद व्यथित, दुखी और क्षुब्ध है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पत्र ने लेखपालों की हकीकत बयां की है।

UP में लेखपालों का दर्द: 200 रुपये साइकिल भत्ता, 100 रुपये में स्टेशनरी और 1500 में मकान भाड़ा, योगी जी सुनिए पुकार
धनीराम यादव ब्यूरो /संचालक उजाला हिंद न्यूज़ चैनल
बहराइच / नानपारा | उजाला हिंद
उत्तर प्रदेश में सरकार की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने वाला लेखपाल आज खुद व्यथित, दुखी और क्षुब्ध है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पत्र ने लेखपालों की हकीकत बयां की है।
पत्र में लेखपालों ने अपनी पीड़ा गिनाई है –
1. 2026 में भी साइकिल भत्ता लेखपाल को आज भी 200-300 रुपये महीना साइकिल भत्ता मिलता है, जबकि आज के जमाने में चपरासी भी साइकिल से काम पर नहीं जाता।
2. 100 रुपये में स्टेशनरी लेखपाल को 100 रुपये मासिक स्टेशनरी भत्ता मिलता है, जबकि खर्च 2000 रुपये तक आता है। इसमें शिकायती प्रार्थना पत्रों के प्रिंट, आख्या के लिए पेपर, स्पॉट की फोटो प्रिंट, फोटो कॉपी आदि शामिल है।
3. HRA सिर्फ 1500 रुपये छोटे से छोटे शहर में भी 4000-5000 रुपये से कम में किराए का मकान नहीं मिलता, बिजली बिल अलग। पर लेखपाल को HRA 1400-1500 रुपये ही मिलता है।
4. खंडहर में चौपाल जनता से मिलने के लिए जर्जर और परित्यक्त खंडहर कमरे मिले हैं जो कभी भी सिर पर गिर सकते हैं।
5. कोई वर्किंग आवर नहीं सुबह 4 बजे भी ड्यूटी और रात 12 बजे भी। दशहरा, दीवाली, ईद, बकरीद, मुहर्रम, शिवरात्रि, मूर्ति विसर्जन, मेला-महोत्सव सबमें ड्यूटी लगती है।
6. चुनाव में 15 दिन की बेगार लोकसभा और विधानसभा चुनाव में 15 दिन तक EVM का रेंडमाइजेशन, बैटरी बदलना, रोल बदलना, मॉक पोल, सील करना आदि काम करता है, पर कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता। जबकि एक चपरासी को भी बक्सा उठाने का मानदेय मिलता है।
7. हर महीने 5-6 दुश्मन लेखपाल जिसकी बात सही होती है उसी का साथ देता है, तो दूसरा पक्ष छेड़छाड़, जातिसूचक शब्द, पैसा लेने, गलत पैमाइश जैसे आरोप लगा देता है। औसतन 5-6 IGRS हर महीने आती हैं। 2 साल में 150-200 लोग ऐसे हो जाते हैं




