सुजौली-हरखापुर मार्ग जलमग्न, त्रिमोहनी पुलिया टूटने से संपर्क कटा
वादाखिलाफी से नाराज ग्रामीणों ने दी मतदान बहिष्कार की चेतावनी

सुजौली-हरखापुर मार्ग जलमग्न, त्रिमोहनी पुलिया टूटने से संपर्क कटा
वादाखिलाफी से नाराज ग्रामीणों ने दी मतदान बहिष्कार की चेतावनी
बहराइच ब्यूरो | 04 सितंबर। बलहा
/सुजौली। सुजौली-हरखापुर संपर्क मार्ग की बदहाल स्थिति से क्षेत्रीय ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। त्रिमोहनी के पास स्थित पुलिया करीब 15 वर्षों से जर्जर होकर टूटी पड़ी है। बारिश के दिनों में मार्ग पर पानी भर जाने से सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है, जिससे सुजौली से हरखापुर होते हुए दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग आवागमन के लिए पूरी तरह बाधित हो जाता है। मार्ग जलमग्न होने के कारण स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मार्ग और पुलिया की समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों के अनुसार, 7 मार्च 2026 को तहसील दिवस में अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर सड़क एवं त्रिमोहनी पुलिया के निर्माण की मांग की गई थी। उस समय अधिकारियों की ओर से एक माह के भीतर निर्माण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। लगातार मिल रहे आश्वासनों के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होने से ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। क्षेत्रीय विधायक सरोज सोनकर की ओर से भी ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया है कि आगामी चुनाव से पहले हरखापुर रोड को प्राथमिकता तथा कारीकोट-सुजौली मार्ग को दूसरी प्राथमिकता पर रखते हुए शत-प्रतिशत निर्माण कार्य कराया जाएगा। हालांकि, ग्रामीण अब केवल आश्वासन के बजाय सड़क निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सुजौली-हरखापुर मार्ग और त्रिमोहनी पुलिया का निर्माण शीघ्र शुरू नहीं कराया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इसके साथ ही ग्रामीणों ने आगामी चुनाव में पूर्ण मतदान बहिष्कार की चेतावनी भी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान अब और टाला नहीं जाना चाहिए।




