आकांक्षी जिले की परिषदीय शिक्षिकाओं ने सीएम योगी को भेजी राखी,उपहार में मांगा अंतर्जनपदीय स्थानांतरण।
रामगांव-बहराइच भारतीय परंपरा के अनुसार रक्षा-बंधन का त्योहार भाई-बहन के पवित्र- प्रेम,अटूट- स्नेह, और आपसी सुरक्षा के वायदे का प्रतीक है,रक्षा वंधन के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र व उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना करती

आकांक्षी जिले की परिषदीय शिक्षिकाओं ने सीएम योगी को भेजी राखी,उपहार में मांगा अंतर्जनपदीय स्थानांतरण।
रिपोर्ट अहमद हुसैन उजाला हिंद न्यूज़ चैनल
रामगांव-बहराइच भारतीय परंपरा के अनुसार रक्षा-बंधन का त्योहार भाई-बहन के पवित्र- प्रेम,अटूट- स्नेह, और आपसी सुरक्षा के वायदे का प्रतीक है,रक्षा वंधन के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र व उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना करती हैं।इसके बदले भाई अपनी बहनों की जीवन पर्यन्त सुरक्षा करने का वचन और उपहार देते हैं, यह त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है,इसके पीछे इंद्र और इंद्राणी, कृष्ण और द्रोपदी,यमराज और यमुना, जैसी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं,जो रक्षा और स्नेह के बंधन को दर्शाती हैं। महाभारत के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की उंगली कट गई थी तब द्रोपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था,जिसके कारण भगवान श्रीकृष्ण के उंगली का रक्त श्राव रुक गया था,इसे ही रक्षा-सूत्र मानकर भगवान श्री कृष्ण ने द्रोपदी के चीर हरण के समय द्रोपदी की लाज बचाई थी।इसे इस संदेह अलंकार के माध्यम से भी समझ सकते है। *साड़ी बीच नारी है,की नारी बीच साड़ी है।।*
*साड़ी ही कि नारी है,कि नारी ही कि साड़ी है।।* भविष्य पुराण और अन्य प्रचलित कथाओं के अनुसार माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को राजा बलि के पास से वापस लाने के लिए राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर उन्हें भाई बनाया था,भविष्य पुराण में भी उल्लेख है कि देवताओं और असुरों के बीच युद्ध के दौरान असुरो को हराने के लिए इंद्राणी अर्थात (शची) ने देवराज इंद्र की कलाई पर रक्षा-सूत्र (धागा) बांधा था जिसके कारण भगवान इंद्र (सुरेश)को विजय मिली थी,आज के समय में यह त्यौहार केवल खून के रिश्तों तक सीमित नहीं है बल्कि यह आपसी स्नेह,भाईचार




