घिसनीपुरवा पहुंचीं प्रधान मुख्य वन संरक्षक, सियार हमले में घायल परिवार से की मुलाकात
बहराइच ब्यूरो 20 सितंबर। प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्य जीव उत्तर प्रदेश श्रीमती अनुराधा वैमूरी, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक/मुख्य वन संरक्षक (मध्य क्षेत्र) उत्तर प्रदेश डॉ. रेणु सिंह एवं वन संरक्षक देवीपाटन वृत्त गोण्डा डॉ. सेम्मारन एम. ने शनिवार को बहराइच वन प्रभाग की बहराइच रेंज अंतर्गत ग्राम घिसनीपुरवा (अमकोलवा) पहुंचकर सियार के हमले की घटना का स्थलीय निरीक्षण किया।

घिसनीपुरवा पहुंचीं प्रधान मुख्य वन संरक्षक, सियार हमले में घायल परिवार से की मुलाकात
बहराइच ब्यूरो
20 सितंबर।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्य जीव उत्तर प्रदेश श्रीमती अनुराधा वैमूरी, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक/मुख्य वन संरक्षक (मध्य क्षेत्र) उत्तर प्रदेश डॉ. रेणु सिंह एवं वन संरक्षक देवीपाटन वृत्त गोण्डा डॉ. सेम्मारन एम. ने शनिवार को बहराइच वन प्रभाग की बहराइच रेंज अंतर्गत ग्राम घिसनीपुरवा (अमकोलवा) पहुंचकर सियार के हमले की घटना का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली तथा हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। परिवारजन के अनुसार श्रीमती सुनीता देवी पत्नी राम प्रसाद अपने बच्चों कु. माधुरी, दीपक तथा अंजनी पुत्री रामू के साथ धान के खेत में निराई करने गई थीं। इसी दौरान अचानक एक सियार ने उन पर हमला कर दिया, जिसमें सुनीता देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं, जबकि अन्य तीन लोगों को हल्की-फुल्की खरोंचें आईं। सभी घायलों का तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचकट्टा में प्राथमिक उपचार कराया गया, जहां से चिकित्सकों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज बहराइच रेफर कर दिया। सुनीता देवी का उपचार मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, जबकि अन्य तीन लोग पूर्ण रूप से स्वस्थ बताए गए हैं। मौके पर विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों को वन्यजीवों से बचाव के संबंध में जागरूक करते हुए सतर्कता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि वन्यजीव दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना दें तथा अकेले खेतों की ओर जाने के बजाय समूह में लाठी-डंडों के साथ जाएं। वन्यजीव के हमले में किसी व्यक्ति के घायल होने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई, जिससे आवश्यक सहायता और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था समय से की जा सके। उच्चाधिकारियों ने मौके पर मौजूद वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।




