बाबागंज के चौरिकोटिया मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, मां के जयकारों से गूंजा परिसर
बाबागंज, बहराइच।* विकास खंड चहलारी अंतर्गत बाबागंज क्षेत्र के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चौरिकोटिया मंदिर में इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। नवरात्रि के पावन अवसर पर दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालु मां के दरबार में मत्था टेकने पहुंच रहे हैं। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं।

बाबागंज के चौरिकोटिया मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, मां के जयकारों से गूंजा परिसर
रिपोर्ट मोहित तिवारी उजाला हिंद न्यूज़ चैनल
*बाबागंज, बहराइच।* विकास खंड चहलारी अंतर्गत बाबागंज क्षेत्र के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चौरिकोटिया मंदिर में इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। नवरात्रि के पावन अवसर पर दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालु मां के दरबार में मत्था टेकने पहुंच रहे हैं। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं।
बताया जाता है कि चौरिकोटिया मंदिर बहराइच जनपद के सबसे प्राचीन और चमत्कारी मंदिरों में से एक है। यहां मां के दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही कारण है कि हर साल नवरात्रि और विशेष पर्वों पर यहां मेले जैसा माहौल रहता है।
*सुबह से ही शुरू हो जाता है पूजन*
मंदिर में सुबह 4 बजे से ही मंगला आरती के साथ कपाट खुल जाते हैं। पुजारी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां का श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद दिन भर दर्शन, पूजन, हवन और भंडारे का क्रम चलता रहता है। शाम को होने वाली महाआरती में तो हजारों की संख्या में भक्त शामिल होते हैं। पूरा मंदिर परिसर ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज उठता है।
*प्रशासन ने किए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम*
भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर में जगह-जगह पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग से लाइन की व्यवस्था की गई है। साथ ही पेयजल, शौचालय और छाया की भी व्यवस्था की गई है।
*व्यापारियों में भी उत्साह*
मंदिर के आसपास लगे मेले में प्रसाद, फूल-माला, खिलौने और चाट-पकौड़ी की दुकानों पर भी खूब भीड़ देखने को मिल रही है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में भीड़ दोगुनी है।
स्थानीय भक्तों ने बताया कि मां चौरिकोटिया सभी पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं। यहां जो भी सच्चे मन से आता है, उसकी झोली मां जरूर भरती हैं।




