सील होने के बाद भी ‘महतो जी हॉस्पिटल’ में चल रहा है खेल: बोर्ड पर डॉक्टरों की फौज धरातल पर सन्नाटा और विभाग की रहस्यमयी चुप्पी
बहराइच मोतीपुर स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे नियमों को ताक पर रखकर जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करने का एक बड़ा खेल फिर से सुर्खियों में है। मोतीपुर क्षेत्र के अंतर्गत परसीपुरवा चौराहे पर संचालित 'महतो जी हॉस्पिटल एण्ड जच्चा-बच्चा केन्द्र' एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है

सील होने के बाद भी ‘महतो जी हॉस्पिटल’ में चल रहा है खेल: बोर्ड पर डॉक्टरों की फौज धरातल पर सन्नाटा और विभाग की रहस्यमयी चुप्पी!
रिपोर्ट अहमद हुसैन
बहराइच मोतीपुर स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे नियमों को ताक पर रखकर जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करने का एक बड़ा खेल फिर से सुर्खियों में है। मोतीपुर क्षेत्र के अंतर्गत परसीपुरवा चौराहे पर संचालित ‘महतो जी हॉस्पिटल एण्ड जच्चा-बच्चा केन्द्र’ एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है।
अतीत में नियमों के उल्लंघन के चलते सील (Seal) किए जा चुके इस कथित अस्पताल में आज भी स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल संचालक की मिलीभगत से ‘लीपा-पोती’ का खेल धड़ल्ले से जारी है।
बोर्ड पर विशेषज्ञ धरातल पर शून्य
अस्पताल के बाहर लगे चमचमाते बड़े बोर्ड को देखकर कोई भी धोखा खा सकता है। बोर्ड पर डिग्रीधारी डॉक्टरों और स्त्री रोग विशेषज्ञों की लंबी-चौड़ी फौज का नाम दर्ज है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है।
कागजी डॉक्टरों की भरमार बोर्ड पर एम.डी. (MD), एम.एस. (MS) और बड़े सर्जनों के नाम लिखकर मरीजों को आकर्षित किया जा रहा है।
सन्नाटे की हकीकत जब धरातल पर तफ्तीश की जाती है, तो अस्पताल के भीतर इन बड़े डॉक्टरों का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं मिलता। विशेषज्ञ डॉक्टरों की जगह या तो सन्नाटा पसरा रहता है या अप्रशिक्षित स्टाफ के भरोसे मरीजों की जान जोखिम में डाली जा रही है।
सील होने के बावजूद दोबारा कैसे खुला ताला?
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठता है।
बड़ा सवाल: जो अस्पताल पूर्व में अनियमितताओं और अवैध संचालन के कारण विभाग द्वारा सील किया जा चुका था, वह दोबारा बिना मानकों को पूरा किए कैसे खुल गया?
सूत्रों की मानें तो कार्रवाई का डर दिखाकर पहले अस्पताल को सील किया जाता है और बाद में कथित रूप से ‘भीतरखाने की सेटिंग’ और लीपा-पोती के आधार पर फिर से शटर उठाने की मूक सहमति दे दी जाती है।
जनता की जान से खिलवाड़ प्रशासन बेखबर
परसीपुरवा चौराहे पर स्थित यह अस्पताल ग्रामीण क्षेत्र के सीधे-सादे मरीजों को अपना शिकार बना रहा है। दूर-दराज से आने वाले ग्रामीण बोर्ड पर डॉक्टरों की डिग्रियां देखकर यहां खिंचे चले आते हैं, लेकिन अंदर उन्हें सिर्फ धोखा मिलता है।
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि निर्माणाधीन और अव्यवस्थित परिसर के बीच यह केंद्र धड़ल्ले से संचालित हो रहा है, जहां मरीजों को सही इलाज मिलने की गारंटी न के बराबर है।
इन सुलगते सवालों का जवाब कौन देगा?
क्या स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को इस अवैध संचालन की भनक नहीं है?
सील किए गए अस्पतालों के दोबारा खुलने की जांच आखिर क्यों नहीं की जाती?
क्या किसी बड़ी अनहोनी या मरीज की जान जाने के बाद ही विभाग की कुंभकर्णी नींद टूटेगी?
स्थानीय जनता अब इस मामले में उच्च अधिकारियों से सख्त हस्तक्षेप और इस लीपा-पोती’ के खेल को खत्म कर अस्पताल संचालक के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही है।




