Welcome to Ujala Hind   Click to listen highlighted text! Welcome to Ujala Hind
उत्तर प्रदेश

अगस्त क्रांति पखवाड़े में शहीद खुदीराम बोस को दी श्रद्धांजलि, सेनानी उत्तराधिकारियों ने किया नमन

बहराइच, 11 अगस्त। अखिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन जिला इकाई बहराइच के तत्वावधान में मनाए जा रहे

अगस्त क्रांति पखवाड़े में शहीद खुदीराम बोस को दी श्रद्धांजलि, सेनानी उत्तराधिकारियों ने किया नमन

 

 

बहराइच, 11 अगस्त। अखिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन जिला इकाई बहराइच के तत्वावधान में मनाए जा रहे ‘अगस्त क्रांति पखवाड़ा’ के क्रम में मंगलवार को स्थानीय सेनानी भवन सभागार में महान क्रांतिकारी एवं अमर शहीद खुदीराम बोस की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में सेनानी उत्तराधिकारियों ने शहीद खुदीराम बोस के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी पक्ष का अप्रतिम योद्धा बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन राज्य इकाई उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि खुदीराम बोस ने अल्पायु में ही देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। उन्होंने बताया कि 30 अप्रैल 1908 को मुजफ्फरपुर में ब्रिटिश जज किंग्सफोर्ड को निशाना बनाकर बम फेंकने की घटना के बाद खुदीराम बोस गिरफ्तार किए गए। दुर्भाग्यवश जिस बग्गी को किंग्सफोर्ड की गाड़ी समझकर निशाना बनाया गया था, उसमें दो ब्रिटिश महिलाएं सवार थीं, जिनकी मृत्यु हो गई। मुकदमे के बाद खुदीराम बोस को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई और 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में उन्होंने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि खुदीराम बोस क्रांतिकारी संगठन ‘युगांतर’ से जुड़े थे और उनके साथी प्रफुल्ल चंद्र चाकी ने पुलिस से घिरने के बाद स्वयं को गोली मारकर शहादत दी। उन्होंने कहा कि खुदीराम बोस का जीवन देशभक्ति, साहस और त्याग की अद्भुत मिसाल है। जिला इकाई बहराइच-श्रावस्ती संगठन के संरक्षक एवं पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी ने कहा कि खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में हुआ था। वे भारत के महान और सबसे कम उम्र के स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्होंने देश के लिए हंसते-हंसते फांसी का फंदा स्वीकार कर लिया। बचपन में ही माता-पिता को खो देने के बाद उनकी बड़ी बहन ने उनका पालन-पोषण किया। बंगाल विभाजन के बाद वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हो गए और श्री अरविंदो तथा भगिनी निवेदिता के विचारों एवं भाषणों से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि खुदीराम बोस अंग्रेजी शासन के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले निर्भीक क्रांतिकारी थे। सेनानी उत्तराधिकारियों ने कहा कि खुदीराम बोस का जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका बलिदान यह संदेश देता है कि देश के लिए कुछ कर गुजरने के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती, बल्कि दृढ़ संकल्प, साहस और राष्ट्रप्रेम सबसे महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने अमर शहीद खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके त्याग और बलिदान को नमन किया। इस अवसर पर संगठन के विशेष कार्याधिकारी भानु प्रताप द्विवेदी एडवोकेट, शहर संगठन मंत्री अजय सिंह, अभिषेक द्विवेदी एडवोकेट, विनय तिवारी, मोहर्रम अली, राकेश श्रीवास्तव, विपिन पाल सहित बड़ी संख्या में देशभक्त एवं सेनानी उत्तराधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ किया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!