गांधीवादी विचारों को अपनाकर अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का आह्वान
बहराइच ब्यूरो 03 अक्टूबर। तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर) क्षेत्र के गिरिजापुरी स्थित सेवार्थ फाउंडेशनच ट्रस्ट कार्यालय में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती समारोह आयोजित किया गया।

गांधीवादी विचारों को अपनाकर अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का आह्वान
बहराइच ब्यूरो 03 अक्टूबर। तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर) क्षेत्र के गिरिजापुरी स्थित सेवार्थ फाउंडेशनच ट्रस्ट कार्यालय में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वन निवासी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण तथा उनके प्रिय भजन ‘रघुपति राघव राजा राम’ के सामूहिक गायन से हुई। इस दौरान वक्ताओं ने महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया। सामाजिक कार्यकर्ता जंग हिंदुस्तानी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के माध्यम से देश को आजादी की राह दिखाई, वहीं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देकर देश के जवानों और किसानों के सम्मान को बढ़ाया। उन्होंने कहा कि देश को खाद्यान्न संकट से उबारने में शास्त्री जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जंग हिंदुस्तानी ने कहा कि गांधीवाद आज भी प्रासंगिक है। दुनिया के कई देश युद्ध का रास्ता चुनते हैं, लेकिन अंततः शांति और अहिंसा के रास्ते को ही महत्व देना पड़ता है। वन अधिकार आंदोलन के अध्यक्ष शंकर सिंह ने कहा कि वन ग्रामों के अधिकारों की लड़ाई हमेशा गांधीवादी तरीके से लड़ी गई है और आंदोलन में कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को जो अधिकार प्राप्त हुए हैं, वे गांधी जी के बताए अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए संघर्ष का परिणाम हैं। वन अधिकार आंदोलन के महासचिव सूरज देव ने कहा कि अभी भी कई वन बस्तियां राजस्व ग्राम का दर्जा पाने से वंचित हैं। इनके लिए निरंतर प्रयास करते हुए शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। महिला नेत्री कांति देवी ने कहा कि आज भी आम लोगों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनसे मुक्ति के लिए निरंतर संघर्ष करते हुए अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी। कार्यक्रम में श्रीरामपुरवा, सुकड़ीपुरवा, रामपुर रेतिया, हल्दी प्लाट, टेडिया, ढकिया कैलाश नगर, निषाद नगर तथा भवानीपुर बिछिया सहित विभिन्न वन ग्रामों से सैकड़ों महिला-पुरुष मौजूद रहे।




