गोंडा जिले के तरबगंज और कर्नलगंज तहसील क्षेत्र के तटीय इलाकों में घाघरा नदी का जलस्तर बीते 24 घंटे से लगातार बढ़ रहा है। नदी ने एक बार फिर तेजी से कटान शुरू कर दी है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

गोंडा जिले के तरबगंज और कर्नलगंज तहसील क्षेत्र के तटीय इलाकों में घाघरा नदी का जलस्तर बीते 24 घंटे से लगातार बढ़ रहा है। नदी ने एक बार फिर तेजी से कटान शुरू कर दी है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
नवाबगंज क्षेत्र के बाणी माझा गांव में फूलचंद यादव, नंदलाल यादव और अमर यादव के छप्पर के मकान कटान की जद में आ गए हैं। नदी उनके घरों तक पहुंच चुकी है, जिसके कारण ये परिवार अपने बचे हुए अस्थाई मकानों को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर रहे हैं। कई किसानों के पास तो खुद की जमीन तक नहीं है वह दूसरे लोगों के जमीन पर अपना आशियाना बना रहे हैं।
घाघरा नदी में पानी बढ़ने से लोग अपने छप्परनुमा घरों को तोड़कर पलायन करने लगे हैं।
घाघरा नदी में पानी बढ़ने से लोग अपने छप्परनुमा घरों को तोड़कर पलायन करने लगे हैं।
नदी का पानी गांव के किनारे तक पहुंच गया है।
नदी का पानी गांव के किनारे तक पहुंच गया है।
नदी के कटान से अब तक फतेह बहादुर यादव के चार छप्पर के मकान, दिनेश यादव का तीन कमरों का पक्का मकान, दयाशंकर यादव का चूल्हा, टीन शेड और छप्पर का मकान नष्ट हो चुके हैं। संजय यादव का एक छप्पर, एक बोरिंग और पांच बीघा जमीन भी नदी में समा गई है।
छप्पर और मकान को तोड़कर लोग पलायन करने लगे हैं।
छप्पर और मकान को तोड़कर लोग पलायन करने लगे हैं।
इसके अतिरिक्त, फतेह बहादुर की दस बीघा गन्ने की जमीन और तरबगंज व करनैलगंज तहसील क्षेत्रों में सैकड़ों बीघा अन्य उपजाऊ फसलें भी कटान की भेंट चढ़ चुकी हैं। गन्ने की फसल के सहारे ही किसान इसकी बिक्री करके अपना पूरा परिवार चलते हैं लेकिन अब उसे ही कट करके नदी अपने आगोश में ले रही है।
नदी किनारे बने मकानों के किनारे तक पानी पहुंच गया है।
नदी किनारे बने मकानों के किनारे तक पानी पहुंच गया है।
मंगलवार सुबह 10 बजे गिरजा बैराज से 11776 क्यूसेक, शारदा बैराज से 84285 क्यूसेक और सरयू बैराज से 1609 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर और तेजी से बढ़ा है।
वर्तमान में, एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से मात्र एक सेंटीमीटर नीचे बह रही है। नदी के तेजी से बढ़ते जलस्तर के कारण कई तटीय गांवों के आसपास पानी पहुंचना शुरू हो गया है। गोंडा जिला आपदा विशेषज्ञ ने बताया कि प्रशासन लगातार अलर्ट मोड पर है और सभी टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं।




