अंगूठा लगवाया राशन नहीं दिया? भौली गांव में उठे सवाल, कोटेदार का दावाए
बहराइच से बड़ी खबर. जरवल के भौली गांव में राशन वितरण को लेकर ग्रामीणों और कोटेदार के दावों ने पूरे मामले को सस्पेंस में डाल दिया

अंगूठा लगवाया राशन नहीं दिया? भौली गांव में उठे सवाल, कोटेदार का दावा
अंगूठा लगवाया ही नहीं!”
बहराइच से बड़ी खबर.
जरवल के भौली गांव में राशन वितरण को लेकर ग्रामीणों और कोटेदार के दावों ने पूरे मामले को सस्पेंस में डाल दिया है।
ग्रामीण एक सुर में कह रहे हैं
“राशन के लिए हमारा अंगूठा लगवाया गया… लेकिन राशन हमें नहीं मिला।”
ग्रामीणों का आरोप है कि जुलाई महीने में अंगूठा लगवाने के बाद जब वे राशन लेने पहुंचे, तो उन्हें बार-बार टाल दिया गया। शिकायतें हुईं, अधिकारियों तक मामला पहुंचा और जांच का आश्वासन भी मिला—लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि कार्रवाई अभी तक नजर नहीं आई।
लेकिन अब कहानी में आया है सबसे बड़ा ट्विस्ट…
जब मीडिया ने सीधे कोटेदार से सवाल किया तो कोटेदार ने ग्रामीणों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
कोटेदार का कहना है—
“मैंने किसी का अंगूठा लगवाया ही नहीं।”
तो फिर आखिर सच क्या है?
ग्रामीण सच बोल रहे हैं या कोटेदार का दावा सही है?
अगर अंगूठा नहीं लगा, तो ग्रामीणों का दावा किस आधार पर है?
और अगर अंगूठा लगा था, तो राशन वितरण का रिकॉर्ड क्या कहता है?
अब इस पूरे मामले में ई-पॉस मशीन का रिकॉर्ड और विभागीय जांच बेहद अहम हो जाती है।
क्योंकि यहां मामला सिर्फ राशन का नहीं…
सवाल है सरकारी राशन व्यवस्था में पारदर्शिता का।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।
भौली गांव में ग्रामीणों के आरोप और कोटेदार के इनकार के बीच अब असली सच जांच की रिपोर्ट से ही सामने आएगा।




