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उत्तर प्रदेश

सेनानी उत्तराधिकारियों ने मनाई रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि

बहराइच ब्यूरो 08 अगस्त। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में सेनानी उत्तराधिकारियों ने नोबेल पुरस्कार विजेता, राष्ट्र गौरव एवं स्वतंत्रता सेनानी रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई

सेनानी उत्तराधिकारियों ने मनाई रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि

 

 

बहराइच ब्यूरो 08 अगस्त। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में सेनानी उत्तराधिकारियों ने नोबेल पुरस्कार विजेता, राष्ट्र गौरव एवं स्वतंत्रता सेनानी रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई। इस दौरान वक्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी और भारतीय साहित्य को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में उनके योगदान को याद किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन संरक्षक एवं पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था। उनकी माता शारदा देवी तथा पिता देवेंद्रनाथ टैगोर थे। वह विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता थे। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। उनकी रचनाओं ने भारतीय साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाई। संगठन के कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि टैगोर ने वर्ष 1921 में पश्चिम बंगाल के बोलपुर में प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की, जिसे आज शांतिनिकेतन के नाम से जाना जाता है। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें वर्ष 1915 में नाइटहुड की उपाधि प्रदान की थी, लेकिन वर्ष 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में उन्होंने यह सम्मान वापस कर दिया। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘गीतांजलि’, ‘गोरा’, ‘जन-गण-मन’, ‘आमार सोनार बांग्ला’ और ‘काबुलीवाला’ प्रमुख हैं। ‘गीतांजलि’ के लिए उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला और वह यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय व्यक्ति बने। संगठन उपाध्यक्ष रामदीन गौतम ने कहा कि बंगाली साहित्य की लगभग हर शाखा टैगोर के अमर योगदान से समृद्ध हुई। उनकी रचनाओं ने देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी भारतीय साहित्य की पहचान स्थापित की। रवीन्द्रनाथ टैगोर का निधन 7 अगस्त 1941 को कोलकाता में हुआ था। सेनानी उत्तराधिकारियों ने उनके अद्भुत व्यक्तित्व, साहित्यिक योगदान और भारतीय संस्कृति को विश्वभर में पहुंचाने के प्रयासों को याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में अनिल उपाध्याय, दोस्त मोहम्मद, अब्दुल रहमान, तुलसी राम मौर्य, श्यामलाल गौतम, यदुनाथ प्रसाद यादव, मुरली पाण्डेय, कृष्ण देव तिवारी, रवीन्द्र कुमार सिंह, शिव नारायण, संगठन जिला महामंत्री राजू मिश्र, मोहर्रम अली सहित बड़ी संख्या में सेनानी उत्तराधिकारी परिवार मौजूद रहे।

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