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उत्तर प्रदेश

प्रथम रविवार को सेनानी भवन में सरदार जोगेन्दर सिंह को दी गई श्रद्धांजलि, गूंजा वंदे मातरम

 प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को सुबह 10 बजे 10 मिनट तक देश के स्वतंत्रता सेनानियों, वीरांगनाओं एवं क्रांतिकारी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के राष्ट्रीय अभियान के तहत रविवार को स्थानीय सेनानी भवन परिसर में महान स्वतंत्रता सेनानी एवं उड़ीसा तथा राजस्थान के पूर्व राज्यपाल सरदार जोगेन्दर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित

प्रथम रविवार को सेनानी भवन में सरदार जोगेन्दर सिंह को दी गई श्रद्धांजलि, गूंजा वंदे मातरम

 

बहराइच ब्यूरो 02 अगस्त

प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को सुबह 10 बजे 10 मिनट तक देश के स्वतंत्रता सेनानियों, वीरांगनाओं एवं क्रांतिकारी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के राष्ट्रीय अभियान के तहत रविवार को स्थानीय सेनानी भवन परिसर में महान स्वतंत्रता सेनानी एवं उड़ीसा तथा राजस्थान के पूर्व राज्यपाल सरदार जोगेन्दर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उपस्थित स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारियों ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन कर राष्ट्रनायकों को नमन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने सरदार जोगेन्दर सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म तत्कालीन बहराइच (वर्तमान श्रावस्ती) जनपद के भंगहा (हरिहरपुर रानी) गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम सरदार अवतार सिंह था तथा उनकी शिक्षा लखनऊ के काल्विन ताल्लुकेदार कॉलेज में हुई। उन्होंने वर्ष 1930 में साइमन कमीशन के विरोध आंदोलन में सक्रिय भागीदारी कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। वर्ष 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह और वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्होंने बहराइच, लखनऊ और नैनी जेल में लगभग तीन वर्ष का कारावास भी भोगा।

संगठन के संरक्षक एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सरदार जोगेन्दर सिंह वर्ष 1952 में सांसद निर्वाचित हुए तथा वर्ष 1971 से 1973 तक उड़ीसा और 1973 से 1978 तक राजस्थान के राज्यपाल के रूप में उत्कृष्ट सेवाएं देकर जनपद और देश का गौरव बढ़ाया। संगठन के उपाध्यक्ष रामदीन गौतम ने कहा कि बहराइच की प्रसिद्ध कांग्रेस त्रयी—पंडित भगवान दीन मिश्र, ठाकुर हुकुम सिंह ‘विसेन’ और सरदार जोगेन्दर सिंह—में उनका महत्वपूर्ण स्थान रहा। उन्होंने कहा कि 10 फरवरी 1979 को उनके निधन के बाद भी उनका राष्ट्रसेवा और संघर्ष का योगदान सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी सेनानी उत्तराधिकारियों ने सरदार जोगेन्दर सिंह के स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान को नमन करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर भानु प्रताप द्विवेदी एडवोकेट, शिव नारायण, तुलसीराम मौर्य, दोस्त मोहम्मद, अब्दुल रहमान, मुरली पाण्डेय, शेषराज तिवारी, रामसागर आर्य सहित अनेक सेनानी उत्तराधिकारी उपस्थित रहे।

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